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Tuesday, April 13, 2010

ज़िन्दगी के इस मोड़ पर

आज की ही है बस ये रात

कहनी थी उनसे कुछ ये बात

जब जब देखा था हमने तुझे

लम्हा वो हर पल का याद आएगा हमे


पहली नज़र में इश्क हुआ था आपसे

कह ना पाए दिल की बात कब से

और आये जब ये बेला आज आपसे

बिछड़ने की दिल आहे भरता है रो रो के


कभी सोचा था ऐसा भी वक़्त आएगा

मिलने के बाद जुदा होने का भी समय आएगा

कभी ख़ुशी कभी गम के इस खेल में

क्या पता था ये दौर भी जुजार जायेगा


मिलने बिछड़ने के इस सफ़र में

कुछ साथी बने तो कुछ हमसफ़र

ऐतबार है मुझको दोस्तों

मिलेंगे हम ज़िन्दगी के और भी कई मोड़ पर

-- श्रीराम

3 comments:

Ana said...

poetry kab karni start kar di han....gud poem...kisne diwana bana diya?

Suruchi said...

kafi sahi keh jate ho kabhi tum...

Sriram Agrawal said...

@ANA Thanx dear! been quite some time... used to write in delhi too sometimes

@ Suruchi: :)